14 जनवरी 2010

सचिव पुरान-हिन्दी हास्य कविता (sachiv parun-hindi hasya kavita)

छोटे नेता ने बड़े नेता से कहा

‘हमारी मेहनत से आप बने बड़े नेता

और अब हमें भुला दिया,

कोई काम लेकर

जब भी आपसे मिलने की कोशिश की

आप अपने हमें सचिव के पास टरका दिया।

वह अपनी मजबूरियां बताकर भगा देता है

कभी कभी तो लगता है कि

हम पुराने लोगों  से अलग कर

आपको उसने बंधक बना लिया।’



सुनकर बोले बड़े नेता

‘भईया, धीरे से बोल

अपना मुंह बिना सोचे मत खोल,

कहीं कोई सुन न ले

तुम्हें गलतफहमी हो गयी है

वह भी पुराना है पर तुम नहीं देख पाये

तुम मैदान में जाकर हमारे लिये

जब जाते लड़ने

उसने पर्दे के पीछे बहुत खेल किया।

वह हमारी पसंद नहीं

बल्कि हम उसकी पसंद हैं

इसलिये उसने अपना स्वामी बना दिया।

तुम नहीं जानते यह खेल

निकल जाता है इसमे तेल

इसलिये बड़ा बनने पर

अपनी उंगली सचिव के हाथ में देकर ही

चलना पड़ता है

जो नहीं चले उनकी राह

उनका बेड़ा भी ऐसे ही सचिवों ने गर्क किया।

हम तुम्हारे मुख हैं

पर सचिव ने अपना मुखौटा बना लिया।

हम जैसे तो बहुत आयेंगे,

पर सचिव के बिना नहीं चल पायेंगे,

हम उसे छोड़े देंगे

तो दूसरे लोग  खुद से जोड़ लेंगे,

सचिव भी ताकत की धार

उसकी तरफ मोड़ देंगे,

भईये, हमारा सचिव अच्छा इंसान है

हमें दुनियां कहती, पर असल में वही महान है

यही सचिव पुरान है,

हम नेताओं का ताज छिन जाता,

पर उनका कोई कुछ बिगाड़ नहीं पाता,

वैसे भी हम ठहरे भाषण देने वाले,

कहीं गद्य सुनाते, कहीं करते कविता

कभी चुटकुले भी सुनाते

किराये पर बुलाते तालियां बजाने वाले,

पद पर पहुंचने के लिये खूब पापड़ बेले

भले ही तुमने वहां पहुंचाया

पर उस बने रहने के लिये

सचिव की कृपा जरूरी है

वह तो ऊपर वाले की कृपा है कि

ऐसा सेवक मिला  

जिसने हमें अपना स्वामी बना लिया।


कवि, लेखक और संपादक-दीपक भारतदीप, ग्वालियर
http://anant-shabd.blogspot.com

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2 टिप्‍पणियां:

gulshan narayan varshney ने कहा…

http://www.youtube.com/watch?v=juzXnmfdkgE (choti si jaan)
link dekhein aur repely karin.

gulshan narayan varshney ने कहा…

http://www.youtube.com/watch?v=juzXnmfdkgE (choti si jaan) link dekhin aur repely karin.

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