26 दिसंबर 2008

सुखानुभूति-हिंदी शायरी

जीवन की धारा में
पानी के बुलबुलों की तरह बहता आदमी
हर पल सुख की तलाश करता जाता
कई पल ऐसे भी आते हैं
जो मन को गुदगुदाते हैं
फिर समय की धारा में
वह भी बह जाते हैं
खुशी के चिराग जलते कुछ पल
पर फिर अंधेर आ ही जाते हैं
सुखानुभूति कोई ऐसी शय नहीं
जिसे आदमी अपनी जेब में रखकर
निरंतर चलता जाये
पर दिल में ख्यालों की जमीन पर
उम्मीदों के पेड़ उग आते हैं
जिन पर सुख के पल फूल की तरह
पहले खिलते
फिर मुरझा जाते हैं
आदमी कितना भी चाहे
उसके हाथ में हमेशा कुछ नहीं
बना रह पाता
समय कभी शय बदलता तो
कभी उसका इस्तेमाल बेकार कर जाता

...................................

यह कविता/आलेख इस ब्लाग ‘दीपक भारतदीप की हिन्दी-पत्रिका’ पर मूल रूप से लिखा गया है। इसके अन्य कहीं भी प्रकाशन की अनुमति नहीं है।
अन्य ब्लाग
1.दीपक भारतदीप की शब्द पत्रिका
2.दीपक भारतदीप का चिंतन
3.दीपक भारतदीप की शब्दयोग-पत्रिकालेखक संपादक-दीपक भारतदीप

2 टिप्‍पणियां:

mehek ने कहा…

समय कभी शय बदलता तो
कभी उसका इस्तेमाल बेकार कर जाता
sahi baat insaan waqt ki kathputali hi hai bahut sundar

GOOGLE CASH ने कहा…

you have given good information i like it and i will tell all my friends

thank you
[url=http://www.onlinemoneymakingtip.com]online money[/url]

समस्त ब्लॉग/पत्रिका का संकलन यहाँ पढ़ें-

पाठकों ने सतत अपनी टिप्पणियों में यह बात लिखी है कि आपके अनेक पत्रिका/ब्लॉग हैं, इसलिए आपका नया पाठ ढूँढने में कठिनाई होती है. उनकी परेशानी को दृष्टिगत रखते हुए इस लेखक द्वारा अपने समस्त ब्लॉग/पत्रिकाओं का एक निजी संग्रहक बनाया गया है हिंद केसरी पत्रिका. अत: नियमित पाठक चाहें तो इस ब्लॉग संग्रहक का पता नोट कर लें. यहाँ नए पाठ वाला ब्लॉग सबसे ऊपर दिखाई देगा. इसके अलावा समस्त ब्लॉग/पत्रिका यहाँ एक साथ दिखाई देंगी.
दीपक भारतदीप की हिंद केसरी पत्रिका


हिंदी मित्र पत्रिका

यह ब्लाग/पत्रिका हिंदी मित्र पत्रिका अनेक ब्लाग का संकलक/संग्रहक है। जिन पाठकों को एक साथ अनेक विषयों पर पढ़ने की इच्छा है, वह यहां क्लिक करें। इसके अलावा जिन मित्रों को अपने ब्लाग यहां दिखाने हैं वह अपने ब्लाग यहां जोड़ सकते हैं। लेखक संपादक दीपक भारतदीप, ग्वालियर

संबद्ध विशिष्ट पत्रिकायें

लोकप्रिय पत्रिकाएँ

वर्डप्रेस की संबद्ध अन्य पत्रिकायें