कभी यूं बिखर जाता हूँ कि
अपने को टुकड़े देख सहम जाता हूँ
फैला है चारों तरह जाल
पर कोई मैं अकेला नहीं फंसा
अपने साथ जमाने को फंसा पाता हूँ
लोग टू चलते हैं जालिमों के आगे सिर झुकाए
मेरा जमीर जिंदा है जो लड़ पाता हूँ
-------------------------
राम का नाम लेते हुए महलों में कदम जमा लिये-दीपक बापू कहिन (ram nam japte
mahalon mein kadam jama dtla-DeepakBapukahin)
-
*जिसमें थक जायें वह भक्ति नहीं है*
*आंसुओं में कोई शक्ति नहीं है।*
*कहें दीपकबापू मन के वीर वह*
*जिनमें कोई आसक्ति नहीं है।*
*---*
*सड़क पर चलकर नहीं देखते...
6 वर्ष पहले
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें