20 दिसंबर 2015

इच्छा घेर ही लेती है-हिन्दी शायरी(Ichchha Gher hi leti hai-Hindi Shayri)

कनखियों से हम पर
नज़र वह कभी कभी डालते
तसल्ली हुई यह जानकर
उस भीड़ में वह शामिल नहीं
जो मुंह फेर लेती है।

दीपकबापू जिंदा रहने के लिये
बहाने ढूंढने को मजबूर नहीं
तारीफ की चाहत से दूर कहीं
फिर भी मनोरम आंखें देखें
कुछ पल के लिये
यह इच्छा घेर ही लेती है।
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दीपक राज कुकरेजा ‘‘भारतदीप’’
ग्वालियर मध्यप्रदेश
Deepak Raj Kukreja "Bharatdeep"
Gwalior Madhyapradesh
संकलक, लेखक और संपादक-दीपक राज कुकरेजा ‘भारतदीप’,ग्वालियर 

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