30 अगस्त 2009

लहरों की अठखेलियां और तूफान-हिंदी कविता (lahren aur toofan-hindi kavita)

अक्ल रख दी गिरवी
ख्वाब दिखाने वालों के पास
नयी सोच से घबड़ाते है
करते अवतार की आस
ऐसे लोग क्या इशारा समझेंगे।
किनारे पर ही खड़े
जो लहरों की अठखेलियां देख डर रहे हैं
वह मझधार में उनके तूफान से क्या लड़ेंगे।
.............................
मन तो चंचल है
उसे स्वयं ही बहलाओ
नहीं तो कोई दूसरा उसे
बहकाकर ले जायेगा
तुम भी बंधे चले जाओगे।
फिर तरसोगे आजादी के लिये
जिसे केवल सपने में ही देख पाओगे।
............................

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