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18 अप्रैल 2010

रिश्ते और जज़्बात-हिन्दी शायरी (rishtey aur jazbat-hindi shayari)

पेड़, पौद्ये, पशु और पक्षी में
दिल लगाना ही क्यों अच्छा लगता है,
शायद इसलिये कि इंसानों की तरह
जज़्बातों से वह खिलवाड़ नहीं करते हैं।
धोखे खाये होंगे हजार जमाने से,
थक गये इंसानों को आजमाने से,
दुर्गंध और बदनीयती से हुआ सामना
जब मिले इंसानी चेहरों से,
इसलिये दे सके जो ताजी हवा
बिना उम्मीद के दिखाये वफा
उन्हीं से रिश्ते निभाने पर जज़्बात मचलते हैं।
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उनके लिये जमाने भर से
घाव अपने दिल पर लेते रहे,
फिर भी कभी उफ नहीं कहा,
अपने मसले हल होते ही
मुंह वह फेर गये
यह भी नहीं पूछा कि
मेरे लिये तुमने कितना दर्द सहा।
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कवि, लेखक और संपादक-दीपक भारतदीप, ग्वालियर
http://anant-shabd.blogspot.com

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14 मार्च 2010

गोली को आंख नहीं होती-हिन्दी व्यंग्य कविताएँ (goli ko ankh nahin hoti-hindi vyangya kavitaen)

दूसरे के दर्द का बयान करना
बहुत आसान और अच्छा लगता है,
जब देखते हैं अपना दर्द तो
वही बयान हल्का लगता है।
आदत है जिनकी दूसरों के बयान करने की
जमाने में लूटते हैं वाहवाही
पर अपने दर्द के साथ जीते हुए भी
उनको बयान करना मुश्किल लगता है।

जीकर देखो अपने दर्द के साथ
सतही बयान करने की आदत चली जायेगी,
शब्दों की नदिया कोई
नई बहार लायेगी,
अपने पसीने से सींचे पाठों में
जीना भी अच्छा लगता है।
अपने दर्द पर लिखते आती है शर्म
क्योंकि बेशर्म बनना मुश्किल लगता है।
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उठा लिये हैं
उन्होंने हथियार
जमाने को इंसाफ दिलाने के लिये।
उन्हें मालुम नहीं कि
गोली को आंख नहीं होती
सही गलत की पहचान करने के लिये।

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कवि, लेखक और संपादक-दीपक भारतदीप, ग्वालियर
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10 मार्च 2010

हंसी हो स्यापा-हिन्दी व्यंग्य कविता (hansi aur gum-hindi satire poem)

खुशी हो या ग़म
हंसी हो या स्यापा
अब बाजार में बिकता है,
कब क्या करना है
प्रचार में इशारा दिखता है।
कभी दिल को गुदगुदाना,
कभी आंखों में आंसु लाना,
सौदागरों का करना है जज़्बातों का सौदा
उनको नहीं मतलब इस बात से कि
किसका बसेगा
या किसका उजड़ेगा घरौंदा,
कलम का गुलाम
उनके पांव तले
उनकी उंगलियों के इशारे पर
हर पल की कहानी लिखता है।

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